बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कम होना या दिमाग की सक्रियता का घटना एक आम चिंता है। लेकिन क्या आपका खानपान इस प्रक्रिया को धीमा कर सकता है? हाल ही में आई एक वैज्ञानिक रिसर्च ने दावा किया है कि लंबे समय तक कैलोरी रिस्ट्रिक्शन यानी नियमित रूप से कैलोरी में कटौती दिमाग को लंबे समय तक हेल्दी रखने में मददगार हो सकती है। लेकिन क्या ये हर किसी के लिए सुरक्षित है? बोस्टन यूनिवर्सिटी चोबानियन एंड अवेडिसियन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं की लम्बे समय तक की गई रिसर्च के मुताबिक जो लोग लंबे समय तक कैलोरी में कटौती करते हैं उनका दिमाग जल्दी बूढ़ा नहीं होता यानी उनके दिमाग की उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है। 26 फरवरी 2026 को जारी इस रिसर्च के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति लम्बे समय तक, लगभग 20 साल तक रोजाना डाइट में 30% कम कैलोरी लेता है तो इससे दिमाग की उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ दिमाग में क्या होता है?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दिमाग की कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स अपनी कार्यक्षमता खोने लगते हैं। नसों के चारों ओर मौजूद मायलिन शीथ जो एक सुरक्षात्मक परत होती है वो कमजोर होने लगती है, जिससे दिमाग के व्हाइट मैटर की गुणवत्ता गिरती है। इस व्हाइट मेटर की क्वालिटी में कमी का असर याददाश्त, सीखने की क्षमता और सोचने की गति पर पड़ सकता है। साथ ही दिमाग की इम्यून कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा सक्रिय होकर सूजन बढ़ा सकती हैं, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ी होती है।

रिसर्च में कैसे हुआ खुलासा?

ये प्रोजेक्ट 1980 के दशक में शुरू हुआ था और इसमें दो समूहों को उनकी नेचुरल उम्र तक को ट्रैक किया गया। रिसर्च में शामिल एक समूह को बैलेंस डाइट दी गई जबकि दूसरे समूह ने लगातार 30% कम कैलोरी का सेवन किया। दोनों समूह में शामिल लोगों का लम्बे समय तक विश्लेषण किया गया। रिसर्च में शामिल लोगों की मृत्यु के बाद उनके दिमाग का पोस्टमार्टम विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने सिंगल-न्यूक्लियस RNA सीक्वेंस तकनीक का इस्तेमाल कर कोशिकाओं के भीतर जीन गतिविधि का अध्ययन किया। दिमाग की कोशिकाओं की जांच करने पर पता चला कि कम कैलोरी लेने वालों के दिमाग की कोशिकाएं ज्यादा स्वस्थ थीं।

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रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने डाइट में कैलोरी की कटौती की थी उनका मेटाबोलिक फंक्शन बेहतर हुआ था। इस समूह में मायलिन से जुड़े जीन अधिक सक्रिय थे। ऊर्जा उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल रास्तों की कार्यक्षमता बेहतर थी। मुख्य शोधकर्ता एना विटानटोनियो के अनुसार ये दुर्लभ और लंबी अवधि का प्रमाण है कि कैलोरी में कमी जटिल प्रजातियों में भी दिमाग की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। रिसर्च में शामिल सह-लेखक प्रोफेसर तारा एल. मूर ने कहा कि ये बदलाव याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़े हो सकते हैं। यानी लंबे समय तक नियंत्रित आहार दिमागी सेहत को बेहतर बनाए रखने में भूमिका निभा सकता है। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक संतुलित तरीके से थोड़ा कम खाना खाने से दिमाग की सेहत बेहतर रह सकती है और बुढ़ापे के असर को कुछ हद तक धीमा किया जा सकता है। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक बहुत कम खाना शुरू करना सही नहीं है। सही तरीका और संतुलन बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष

यह अध्ययन संकेत देता है कि लंबे समय तक संतुलित तरीके से कम कैलोरी लेना दिमाग की कोशिकाओं को संरक्षित रखने और उम्र से जुड़े बदलावों को धीमा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह की कैलोरी कटौती अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूरी है।

डिस्क्लेमर

यह लेख हालिया वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। लंबे समय तक कैलोरी में कटौती (Calorie Restriction) हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। विशेष रूप से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, किशोर, मधुमेह, थायरॉयड, हृदय रोग या किसी अन्य क्रॉनिक बीमारी से ग्रस्त लोग बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी डाइट में बदलाव न करें। अचानक या अत्यधिक कैलोरी कम करने से कमजोरी, पोषण की कमी, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी तरह का डाइट परिवर्तन शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर या क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श लेना आवश्यक है।