72 feet Hanuman Ji Statue: पाली-सोजत हाईवे पर स्थित 72 फीट ऊंची हनुमान जी की भव्य प्रतिमा शहर की पहचान बन चुकी है. इसकी विशालता इतनी प्रभावशाली है कि दूर से ही नजर आ जाती है और राहगीरों को पाली में प्रवेश का संकेत देती है. इस प्रतिमा के निर्माण के पीछे गादीपति ओम महाराज का दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक प्रेरणा जुड़ी है. साल 2007 में आए एक सपने को साकार करने के लिए उन्होंने अन्न त्याग तक कर दिया. समाज के सहयोग से यह भव्य प्रतिमा बनकर तैयार हुई, जो आज आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है.
पाली-सोजत सिटी हाईवे से गुजरते ही आसमान को छूती भगवान हनुमान की 72 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा बरबस ही सबका ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. यह भव्य प्रतिमा अब पाली शहर की एक विशिष्ट पहचान बन चुकी है. हाईवे के किनारे स्थित होने के कारण राहगीरों को दूर से ही आभास हो जाता है कि वे पाली शहर की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं. इस प्रतिमा की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके सामने से गुजरने वाला ओवरब्रिज भी छोटा नजर आता है.
इस भव्य निर्माण के पीछे गादीपति ओम महाराज का अटूट संकल्प और एक आध्यात्मिक प्रेरणा जुड़ी है. महाराज बताते हैं कि साल 2007 में उन्हें एक सपना आया था कि दिल्ली की तर्ज पर पाली में भी बजरंगबली की एक विशाल प्रतिमा होनी चाहिए. इसी स्वप्न को ध्येय मानकर उन्होंने 72 फीट ऊंची प्रतिमा बनवाने का कठिन संकल्प लिया. हालांकि, शुरुआत में जमीन और भारी भरकम बजट जैसी कई चुनौतियां सामने थीं, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय ने राह आसान कर दी.
प्रतिमा निर्माण के संकल्प को सिद्ध करने के लिए ओम महाराज ने एक कठोर तपस्या शुरू की. उन्होंने कसम खाई कि जब तक बालाजी की यह 72 फीट ऊंची प्रतिमा बनकर तैयार नहीं हो जाती, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे. उनके इस त्याग और सेवा भाव को देखकर धीरे-धीरे समाज के दानदाता और भामाशाह आगे आए. किसी ने जमीन दान दी तो किसी ने आर्थिक सहयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप महाराज का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ.
यह प्रतिमा अत्यंत मनमोहक है, जिसमें हनुमान जी के कंधों पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण विराजित हैं. इस मंदिर की नींव 13 फरवरी 2007 को रखी गई थी और 10 दिसंबर 2010 को इसकी प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई. प्रतिष्ठा का समारोह इतना भव्य था कि पूरे राज्य से श्रद्धालु उमड़े थे. उस दौरान एक अद्भुत कीर्तिमान भी बना, जब श्रद्धालुओं के प्रसाद के लिए 10 हजार 800 किलो आटे का एक विशाल ‘रोट’ तैयार किया गया था.
72 फीट बालाजी के गादीपति ओम महाराज ने बताया कि साल 2007 की बात है. सपना आया कि पाली में भी दिल्ली की तर्ज पर भगवान हनुमान की प्रतिमा होनी चाहिए. फिर क्या था मैंने संकल्प ले लिया कि पाली में भी 72 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा बनवाऊंगा लेकिन यह इतना आसाना नहीं था. एक तो मंदिर निर्माण के लिए जमीन चाहिए थी. दूसरी बात इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए रुपयों की आवश्यकता थी. संकल्प पूरा करने के लिए अन्न त्याग कर लिया और कसम खाई कि बालाजी की 72 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने के बाद ही अन्न ग्रहण करूंगा. दानदाताओं ने जमीन दी फिर भामाशाह भी जुड़ गए. वह दिन भी आया जब मेरा सपना पूरा हुआ और प्रतिमा बनकर तैयार हो गई.




