बदलता लाइफस्टाइल और खराब खानपान आज कम उम्र में ही लोगों को गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहा है। पिछले एक दशक में यह देखा गया है कि 30 की उम्र के आसपास ही लोग डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी, फेफड़ों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ऐसे में समय रहते इस समस्या को समझना और उसे कंट्रोल करना बेहद जरूरी हो गया है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते टाइप-2 डायबिटीज और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इसे कंट्रोल करना बहुत मुश्किल नहीं है।

एक प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पल मणिक्कम के इंस्टाग्राम पोस्ट के मुताबिक वॉक करने की एक छोटी सी आदत अगले 5–10 सालों में आपकी बॉडी को पूरी तरह बदल सकती है। रोजाना आधा घंटे की वॉक आपके पाचन तंत्र को मजबूत कर सकती है, स्टैमिना बूस्ट कर सकती है और डायबिटीज से बचाव कर सकती है। आइए डायबिटोलॉजिस्ट से समझते हैं कि आखिर डॉ.मणिक्कम के इंस्टाग्राम पोस्ट में कितनी सच्चाई है।

वॉक कैसे बढ़ती उम्र में बीमारियों से बचाती है?  

मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव घोडी के अनुसार 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से वॉक करने से ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है। इस उम्र के आस-पास कई लोगों में मेटाबॉलिक बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे बैठकर काम करना, अनियमित खानपान और बढ़ता तनाव। ये सभी कारक धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

नियमित शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज़ चाल से चलना, शरीर को ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करने में मदद करता है। डॉ. घोडी ने बताया जब आप वॉक करते हैं तो आपकी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वे ऊर्जा के लिए खून से ग्लूकोज खींचती हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है। समय के साथ यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी बेहतर बनाता है, यानी शरीर को ग्लूकोज मैनेज करने के लिए कम इंसुलिन की जरूरत पड़ती है।

अगर कोई व्यक्ति कम उम्र में वॉकिंग शुरू करता है और इसे नियमित रूप से जारी रखता है तो 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसका मेटाबॉलिज्म ज्यादा लचीला हो सकता है जिससे ब्लड शुगर पैटर्न बेहतर रहता हैं और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।

ब्लड शुगर रेगुलेशन में वॉकिंग की भूमिका

वॉकिंग शरीर की बड़ी मांसपेशियों को सक्रिय करती है, जो ग्लूकोज को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करती हैं। इस प्रक्रिया से ग्लूकोज खून से निकलकर मांसपेशियों में अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचता है, जिससे खाने के बाद ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने को रोका जा सकता है। इसके अलावा नियमित वॉकिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी सुधारता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देता हैं और ग्लूकोज का इस्तेमाल सही तरीके से होता है।

क्या 30 मिनट की वॉक पर्याप्त है?

डॉ. घोडी के अनुसार, हफ्ते के ज्यादातर दिनों में करीब 30 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली वॉक मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए पर्याप्त मानी जाती है। एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे जरूरी चीज़ इंटेंसिटी नहीं, बल्कि नियमित वॉक करना है। बॉडी एक्टिविटी ब्लड शुगर कंट्रोल करने, वजन मैनेज करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है।

बढ़ती उम्र में बीमारियों से बचाव के लिए ये आदतें भी हैं जिम्मेदार

नियमित वॉक के साथ-साथ लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़ी आदतें भी आपको बीमारी से बचाने में मददगार हैं। संतुलित आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें ये सेहत के दुश्मन है। पर्याप्त नींद लें। डॉ. घोडी बताते हैं 30 की उम्र में अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर मेटाबॉलिक हेल्थ को तय करती हैं। फिजिकल एक्टिविटी के प्रति जागरूक रवैया लंबे समय में डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

निष्कर्ष

अगर आप 35 की उम्र से ही रोज़ाना वॉकिंग शुरू करते हैं और इसे नियमित रखते हैं तो 40 की उम्र तक आपका ब्लड शुगर, पाचन और स्टैमिना बेहतर रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है। छोटी लेकिन लगातार अपनाई गई आदतें आपको बढ़ती उम्र में सेहतमंद रख सकती है।

डिस्क्लेमर

यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई दिनचर्या को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें