ऑस्ट्रेलियाई हेल्थ एजुकेटर , लेखिका और प्राकृतिक इलाज की प्रमोटर बारबरा ओ’नील ने बताया दांतों की सेहत का सीधा संबंध हमारे मानसिक तनाव और डाइट से है। डेंटल हेल्थ के लिए तनाव कंट्रोल करना जरूरी है।

अक्सर हम ओरल हेल्थ (Oral Health) को सिर्फ ब्रश और कुल्ला तक सीमित समझ लेते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च बताती है कि दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारियां शरीर में कई गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें, जिन्हें हम सामान्य मानते हैं, दरअसल ओरल हेल्थ के लिए “साइलेंट किलर” साबित हो सकती हैं और धीरे-धीरे दांतों की जड़ों को कमजोर कर देती हैं। डॉ. वेस्टन ए. प्राइस एक कनाडा में जन्मे डेंटिस्ट और रिसर्चर थे, जिन्होंने पोषण, दांतों और शरीर की सेहत के बीच गहरा संबंध बताया है। शोधकर्ता ने पाया जब लोग पारंपरिक डाइट से हटकर प्रोसेस्ड और आधुनिक डाइट अपनाते हैं, तो दांतों की सड़न और कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ने लगती हैं।
Clinical Discovery Seniors एक हेल्थ एजुकेशन प्लेटफॉर्म है, जहां आम लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में समझाई जाती है। इस प्लैटफॉर्म पर दांतों से जुड़ी परेशानी के लिए बारबरा ओ’नील जो एक ऑस्ट्रेलियाई हेल्थ एजुकेटर , लेखिका और प्राकृतिक इलाज की प्रमोटर हैं ने बताया दांतों की सेहत का सीधा संबंध हमारे मानसिक तनाव (Stress) और डाइट से है। तनाव में दांत पीसना या गलत खान-पान न केवल इनेमल को नुकसान पहुंचाता है बल्कि समय से पहले दांतों के गिरने का कारण भी बनता है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर तनाव कैसे हमारी ओरल हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है। कौन सी खराब आदतें हैं जो हमारी ओरल हेल्थ को बिगाड़ रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक कौन से ऐसे बदलाव करें कि हमारी ओरल हेल्थ में सुधार हो और हमारी मुस्कान उम्र भर महफूज रहे। आइए, नई मेडिकल रिसर्च और एक्सपर्ट की राय के आधार पर समझते हैं डेंटल केयर के ये जरूरी नियम।
तनाव कैसे दांतों की सेहत पर करता है असर?
मानसिक तनाव सिर्फ दिमाग ही नहीं, दांतों पर भी बुरा असर डालता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार तनाव बढ़ने पर लार (Saliva) अधिक अम्लीय हो जाती है। ऐसी स्थिति में लार दांतों की सुरक्षा करने के बजाय उनके इनेमल को धीरे-धीरे कमजोर करने लगती है। यही वजह है कि तनाव को दांतों का साइलेंट दुश्मन कहा जाता है। लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से दांतों में सड़न और मसूड़ों की समस्या बढ़ सकती है।
कौन सी आदते हैं जो दांतों को पहुंचाती हैं नुकसान
दांतों की सही तरह सफाई नहीं करना
डेंटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि दांतों की अगर सफाई नहीं की जाए तो दांतों में खाना फंसा रहता है। दांतों के बीच फंसा खाना बैक्टीरिया के लिए सबसे बड़ा स्रोत होता है। जब ये खाना दांतों से साफ नहीं होता, तो बैक्टीरिया उस पर पनपते हैं और उनके द्वारा बने टॉक्सिन दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं है, बल्कि दांतों की सही सफाई के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाना भी जरूरी हैं।
शुगर है दांतों की सबसे बड़ी दुश्मन
डेंटल हेल्थ के लिए सबसे बड़ा खतरा शुगर को माना जाता है। शुगर से भरपूर ड्रिंक्स और फूड्स बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे एसिड बनता है और दांतों का इनेमल कमजोर होता है। इसलिए मीठे पेय और ज्यादा शुगर वाली चीजों से दूरी बनाना जरूरी है।
दांतों का पीसना
दांतों का सोते समय पीसना या रगड़ना आपके दांतों की हेल्थ के लिए जहर है। तनाव के कारण सोते समय या अनजाने में दांत पीसना जिसे ब्रुक्सिज्म (Bruxism) कहा जाता है इस आदत को बदलें वरना आपकी ओरल हेल्थ बिगड़ सकती है।
हार्ड ब्रशिंग
दांतों को बहुत जोर से रगड़ना, या दांतों पर हार्ड ब्रश करना आपके दांतों और मसूड़ों की सेहत को बिगाड़ सकता है। हार्ड ब्रशिंग करने से मसूड़े पीछे हटने लगते हैं जिससे आपके दांत जल्दी टूट सकते हैं।
ओरल हेल्थ में कैसे करें सुधार
ब्रश के साथ फ्लॉसिंग और कुल्ला भी जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि हर भोजन के बाद कुल्ला करना चाहिए। नमक के पानी या हल्के बेकिंग सोडा वाले पानी से मुंह साफ करने से बैक्टीरिया कम होते हैं। इसके अलावा रात में सोने से पहले फ्लॉसिंग करना बेहद जरूरी है, क्योंकि रातभर दांतों में मौजूद बैक्टीरिया तेजी से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ऑयल पुलिंग बहुत पुराना लेकिन असरदार उपाय
दांतों की सेहत के लिए ऑयल पुलिंग एक पारंपरिक और प्रभावी तरीका है। इसमें थोड़ी मात्रा में नारियल तेल मुंह में लेकर कुछ समय तक घुमाया जाता है। इससे टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिन में 1–2 बार ऑयल पुलिंग करने से बैक्टीरिया कंट्रोल होते हैं और दांतों की सड़न धीमी पड़ती है।
दांतों के लिए फायदेमंद फूड्स खाएं
एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ नेचुरल फूड्स दांतों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। सेब जैसे क्रंची फल चबाने से लार का उत्पादन बढ़ता है, जिससे दांत साफ रहते हैं और मसूड़े मजबूत होते हैं। वहीं, गाजर, खीरा और सेलेरी जैसी सब्जियां दांतों और जबड़े को मजबूत बनाती हैं और उनकी सही संरचना बनाए रखने में मदद करती हैं। इन छोटे-छोटे बदलाव से आपको बड़ा फायदा मिलेगा। रिसर्च के अनुसार मिनरल्स से भरपूर डाइट, सही मात्रा में पानी पीना और तनाव को कंट्रोल रखना दांतों की नेचुरल मरम्मत प्रक्रिया को सक्रिय करता है। यानी दांतों को स्वस्थ रखने के लिए किसी बड़े इलाज की जरूरत नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ही सबसे ज्यादा असरदार होती हैं।
निष्कर्ष
अगर आप चाहते हैं कि आपके दांत लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रहें, तो रोजाना पानी पीना, कुल्ला करना, फ्लॉसिंग, ऑयल पुलिंग और शुगर कंट्रोल जैसी आदतों को अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बना लें।
डिस्क्लेमर:
ये लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। दांतों या मसूड़ों में किसी भी प्रकार के दर्द, खून आने या सेंसिटिविटी की स्थिति में तुरंत किसी योग्य डेंटिस्ट (Dentist) से परामर्श लें। घरेलू नुस्खे या डाइट में बदलाव डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं हैं। जंसत्ता इन जानकारियों की चिकित्सा सटीकता का दावा नहीं करता है।





