सिरदर्द को अक्सर हम थकान या तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी ये नॉर्मल सा दिखने वाला दर्द शरीर के सबसे जरूरी अंग मस्तिष्क में पनप रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है? ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी चिकित्सा स्थिति है जिसका नाम सुनते ही मन में डर बैठ जाता है, लेकिन मेडिकल साइंस के मुताबिक अगर इसकी पहचान शुरुआती लक्षणों (Early Warning Signs) के आधार पर कर ली जाए, तो सही उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

Manipal Hospital Gurgaon में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख Dr Puneet Kant Arora के अनुसार जब मस्तिष्क की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होता है, तो ये कोशिकाएं सामान्य नियंत्रण खो देती हैं और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। इसी असामान्य वृद्धि के कारण ब्रेन ट्यूमर विकसित होता है। हालांकि, ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन जेनेटिक बदलाव और कुछ पर्यावरणीय फैक्टर को इसका संभावित कारण माना जाता है।

एक्सपर्ट ने बताया ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे सिरदर्द या कमजोरी की तरह लग सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के सामान्य लक्षण कौन-कौन से है और किन लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण (Brain Tumor Symptoms)

  • लगातार रहने वाला या धीरे-धीरे बढ़ता सिरदर्द
  • सुबह के समय ज्यादा सिरदर्द या सिर भारी लगना
  • बार-बार उल्टी या मितली आना, खासकर बिना किसी कारण
  • धुंधला दिखना, डबल विजन या नजर कमजोर होना
  • बोलने, समझने या याददाश्त में दिक्कत होना
  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना
  • चलने-फिरने में संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना
  • बार-बार दौरे पड़ना
  • व्यवहार या पर्सनैलिटी में अचानक बदलाव
  • सुनने में परेशानी या कानों में आवाज आना

ट्यूमर कैसे पनपता है और इसके कितने है प्रकार

ट्यूमर शरीर में बनने वाली असामान्य कोशिकाओं का एक समूह होता है, जो किसी भी अंग या ऊतक में विकसित हो सकता है। जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं करतीं, तब ट्यूमर बनता है। ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं बेनाइन (Benign) और मैलिग्नेंट (Malignant)। बेनाइन ट्यूमर आमतौर पर गैर-कैंसरस होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते। वहीं मैलिग्नेंट ट्यूमर कैंसर का रूप होते हैं, जो तेजी से बढ़ते हैं और शरीर के अन्य अंगों में फैलने की क्षमता रखते हैं। ट्यूमर का असर उसके आकार, स्थान और प्रकार पर निर्भर करता है, जो शरीर के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

किन लोगों को ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा होता है?

ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम दूसरों की तुलना में अधिक होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक जिन लोगों की  फैमिली हिस्ट्री है , रेडिएशन का ज्यादा एक्सपोजर है, बढ़ती उम्र, खतरनाक केमिकल्स के संपर्क में रहना, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा होता है।

ब्रेन ट्यूमर से कैसे करें बचाव

  • ब्रेन ट्यूमर से पूरी तरह बचाव का कोई पक्का तरीका नहीं है, लेकिन सही लाइफस्टाइल और कुछ सावधानियां अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • बिना जरूरत बार-बार एक्स-रे या सीटी स्कैन कराने से बचें। मेडिकल जांच हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही कराएं।
    कीटनाशक, इंडस्ट्रियल केमिकल्स और टॉक्सिक पदार्थों के संपर्क में आने से बचें।
    हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। डाइट में फल, सब्जियां और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर फूड्स का सेवन करें।
    रोजाना शारीरिक गतिविधि से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है।
    पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस को कंट्रोल करें।
    बार-बार सिरदर्द, चक्कर, या नजर में बदलाव जैसे संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
    रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं। खासकर अगर परिवार में ट्यूमर या कैंसर का इतिहास रहा हो।
    समय पर सावधानी और शुरुआती पहचान ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। यदि आप या आपके परिचित लेख में बताए गए किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत किसी योग्य न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें। hum किसी भी स्वास्थ्य संबंधी दावे की पुष्टि नहीं करता है